भिण्ड/ अगस्त माह की प्राकृतिक आपदा ने चम्बल-ग्वालियर संभाग के कई आवागमन को जोड़ने वाले पुलों को ध्वस्त कर दिया। या फिर यह कहें, की एक संभावित बड़ा खतरा बाढ़ के आ जाने से टल गया, अगर बाढ़ ना आती तो निश्चित ही एक दिन रेत की दीवार की तरह ढहने वाले पुल किसी बड़े हादसा का कारण बनते । आज जन हानि से सैकड़ों लोग बच गये लेकिन यह आपदा शाशन और प्रशाशन के घटिया निर्माण की पोल खुल गयी, यह कैसा निर्माण था ? जो बाढ़ का एक हल्का सा वेग ना झेल सका क्या इनके निर्माण के समय इन बातों का ध्यान नही रखा जाता कि कभी किसी भी तरह की आपदा आ सकती है, शायद ऐसा नही हुआ प्रशानिक अधिकारियों की लापरवाही और बंदरबांट के कारण निर्माण के गुणवत्ता का ध्यान नही रखा जाता है। अगर यूँ ही जनता की अरबों की गाड़ी कमाई शाशन-प्रशाशन की लापरवाही और कमीशनखोरी के खेल- की भेंट चढ़ती रहीं तो कभी भी निर्माण के गुणवत्ता का ध्यान नही रखा जाएगा। इसलिये निश्चित ही गुणवत्ताविहीन इन पुलों के निर्माण की जांच कोई स्पेशल जांच कमेठी गठित कर की जाए, जिससे आने वाले समय में निर्माण में होने वाली लापरवाही पर अंकुश लगाया जा सके, वहीं शाशन-प्रशासन में बैठे ऐसे लोग जो,अपनी काली कमाई के आगे जनता के हितों को सर्वोपरि नही मानते । पुलों के घटिया निर्माण की जांच हेतु उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाने की तैयारी भी प्रभावित क्षेत्रो के समाज सेवकों को करना चाइये।
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शाशन के घटिया निर्माण की खुली पोल, बाढ़ में बह गयी जनता की गाड़ी कमाई। निर्माण के गुणवत्ता की हो जांच- मलखानसिंह
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